भारतराजनीति

वीडियो में साफ दिख रहे हैं चेहरे फिर भी पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ दर्ज की FIR

देश की राजधानी दिल्ली में एक बार फिर दंगा भड़काने की साज़िश चल रही है। पूर्व भाजपा विधायक अश्विनी उपाध्याय के आह्वान पर एक उग्रवादी भीड़ ने मुसलमानों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

 

जनसंख्या नियंत्रण कानून, यूनिफार्म सिविल कोड और NRC जैसे विवादित कानूनों की मांगों को लेकर हिंदुत्ववादी संगठनों के कुछ लोगों ने कल संसद मार्ग थाना मार्ग खूब हंगामा मचाया। रैली में शामिल लोगों ने मुसलमानों के खिलाफ भी जमकर ज़हर उगला।

उग्रवादी भीड़ ने “जब मुल्ले काटे जाएंगे, राम राम चिल्लायेंगे” और “हिंदुस्तान में रहना होगा, तो जय श्री राम” कहना होगा जैसे साम्प्रदायिक नारे लगाए।

भड़काऊ नारों के वीडियो सोशल सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है।

कांग्रेस अल्पसंख्यक आयोग के नवनियुक्त अध्यक्ष एवं मशहूर शायर इमरान प्रतापगढ़ी ने भी ट्विटर पर इस वीडियो को साझा किया है। साथ ही उन्होंने इन हिंदुत्ववादी लोगों की गिरफ्तारी की भी मांग की है।

साथ हो उन्होंने एक अन्य ट्वीट में लिखा है कि “इस देश की संसद का वक़ार सबसे बड़ा है, इन दिनों संसद का सत्र भी चल रहा है लेकिन जहॉं इन दंगाइयों ने काटने मारने के नारे लगाये वहॉं से संसद की दीवारों की दूरी महज़ 200 मीटर होगी, सोचिये क्या सरकार के किसी कारिंदे तक उन नारों का शोर नहीं पँहुचा ?
नरेंद्र मोदी जी क्या है सबका साथ ??”

सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद मुस्लिम समुदाय के लोगों में ग़ुस्सा है और लोग सोशल मीडिया पर उन गुंडों के खिलाफ कार्यवाही की मांग कर रहे हैं।

लोगों के ग़ुस्से को देखते हुए पुलिस ने FIR दर्ज किया है। हैरत की बात ये है कि वीडियो में साफ साफ देखा जा सकता है कि कुछ लोग नारेबाज़ी कर रहे हैं। वीडियो में उन गुंडों को पहचाना भी जा सकता है। कुछ लोगों की पहचान लोग सोशल मीडिया पर शेयर कर रहे हैं। इन सबके बावजूद भी पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ FIR दर्ज क्यों किया है?

ऐसे में लोग सवाल पूछ रहे हैं कि आखिर पुलिस इस मामले में छानबीन क्यों नहीं कर रही है? क्या पुलिस जानबूझकर इन गुंडों की पहचान छुपा रही है?

पत्रकार श्याम मीरा सिंह ने पुलिस की कार्यवाही पर सवाल उठाते हुए लिखा है कि “इस दंगाई भीड़ के मामले में दिल्ली पुलिस ने “Unknown” के विरुद्ध FIR की है. पुलिस चाहे तो इस मामले में किसी अब्दुल के ख़िलाफ़ UAPA लगा सकती है. नहीं तो नक्सली कनेक्शन जोड़ते हुए मेरा नाम दर्ज कर ले. न्याय होना चाहिए. ऐसे ही तो न्याय मिलने का इतिहास रहा है हमारे यहाँ”

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Back to top button