पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर मंडरा रहे खतरे के बीच ईरान ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण Strait of Hormuz से कुछ भारतीय ध्वज वाले जहाजों को गुजरने की अनुमति दी है। इस फैसले के बाद भारत में यह चर्चा तेज हो गई है कि आखिर तेहरान ने यह कदम किन कारणों से उठाया।
भारत में ईरान के सर्वोच्च नेता Ali Khamenei के प्रतिनिधि Abdul Majid Hakim Elahi ने इस फैसले के पीछे एक अहम वजह बताई है। एएनआई को दिए एक साक्षात्कार में उन्होंने कहा कि मौजूदा संघर्ष के दौरान आम भारतीयों द्वारा ईरान के प्रति दिखाई गई “सहानुभूति” और समर्थन ने इस निर्णय को प्रभावित किया।
जब उनसे पूछा गया कि क्या भारतीय जहाजों को सुरक्षित मार्ग मिलता रहेगा, तो उन्होंने कहा, “बिल्कुल, हाँ।” उन्होंने बताया कि ईरान के दूतावास ने जलडमरूमध्य से कुछ भारतीय जहाजों के पारगमन को सुगम बनाने के लिए प्रयास किए हैं।
दरअसल 28 फरवरी से पश्चिम एशिया में अमेरिका और इज़राइल एक तरफ तथा Iran दूसरी तरफ आमने-सामने हैं। इस टकराव का असर समुद्री व्यापार मार्गों पर भी पड़ा है। रिपोर्टों के अनुसार ईरान ने रणनीतिक दृष्टि से बेहद अहम होर्मुज जलडमरूमध्य तक पहुंच को सीमित कर दिया है, जो वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का प्रमुख रास्ता माना जाता है।
इलाही के अनुसार भारत को दी गई यह राहत भारतीय जनभावना को भी दर्शाती है। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक युद्ध का विरोध कर रहे हैं और ईरान के प्रति सहानुभूति जता रहे हैं। उनके मुताबिक ईरानी अधिकारियों को इस समर्थन की जानकारी दी गई थी और वे भारत की ऊर्जा जरूरतों से भी भली-भांति परिचित हैं।
उन्होंने कहा, “वे सहानुभूति और एकजुटता दिखाते हैं और हमें भी बदले में उनका समर्थन करना चाहिए। भारत में हमारे भाइयों और बहनों की सहायता के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।”
इससे पहले भारतीय ध्वज वाले दो एलपीजी जहाजों को भी होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति दी गई थी, जो मौजूदा संघर्ष के बावजूद कुछ हद तक प्रतिबंधों में ढील का संकेत माना जा रहा है।

