Journo Mirror
India

मुरादाबाद: मुस्तफा मस्जिद पर बिना औपचारिक आदेश के नहीं चलेगा बुलडोजर, इलाहाबाद हाईकोर्ट में प्राधिकरण ने दिया आश्वासन

मुरादाबाद: उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले के पाकबड़ा इलाके में स्थित मुस्तफा मस्जिद को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान मुरादाबाद विकास प्राधिकरण (एमडीए) ने आश्वासन दिया है कि मस्जिद के खिलाफ औपचारिक ध्वस्तीकरण आदेश पारित किए बिना कोई तोड़फोड़ की कार्रवाई नहीं की जाएगी। मस्जिद प्रबंधन की ओर से प्राधिकरण के कारण बताओ नोटिस को चुनौती देते हुए अदालत में याचिका दाखिल की गई है।

यह मामला 24 सितंबर को हाईकोर्ट में सुनवाई के लिए आया। मस्जिद की ओर से जीशान अहमद फरीद ने याचिका दाखिल की है। मस्जिद के प्रबंधक को 21 अगस्त 2026 को उत्तर प्रदेश नगर नियोजन एवं विकास अधिनियम, 1973 की धारा 27 के तहत नोटिस जारी किया गया था। इस नोटिस में निर्माण को कथित तौर पर अनधिकृत बताते हुए पूछा गया था कि इसे गिराने का आदेश क्यों न दिया जाए।

एमडीए के नोटिस के मुताबिक, मुस्तफा मस्जिद मुरादाबाद के पाकबड़ा इलाके में दिल्ली रोड पर टीएमयू विश्वविद्यालय के पास मोहल्ला ईदगाह में लगभग 300 वर्ग मीटर क्षेत्र में बनी हुई है। प्राधिकरण का कहना था कि निरीक्षण के दौरान निर्माण की स्वीकृति से संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए गए। नोटिस में आरोप लगाया गया कि निर्माण विकास प्राधिकरण की अनुमति के बिना किया गया, जो संबंधित कानून की धाराओं 14 और 15 का उल्लंघन है। हालांकि, मस्जिद प्रबंधन ने इस नोटिस को अदालत में चुनौती दी है।

मस्जिद की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता शशि नंदन ने अदालत में दलील दी कि नोटिस का जवाब देने के लिए पर्याप्त समय नहीं दिया गया। उनके मुताबिक, मस्जिद प्रबंधन को कम से कम 15 दिन का समय मिलना चाहिए था, जबकि नोटिस में 3 सितंबर तक जवाब देने को कहा गया था। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि नोटिस में संबंधित जमीन और उस हिस्से का स्पष्ट विवरण नहीं दिया गया, जिसे गिराने का प्रस्ताव था। वकील ने बताया कि जवाब दाखिल करने से पहले आवश्यक दस्तावेज हासिल करने के लिए भी आवेदन किया गया था।

मुरादाबाद विकास प्राधिकरण की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता एमसी चतुर्वेदी ने अदालत से मामले में निर्देश प्राप्त करने के लिए एक सप्ताह का समय मांगा। साथ ही उन्होंने आश्वासन दिया कि ध्वस्तीकरण का औपचारिक आदेश पारित होने से पहले मस्जिद के खिलाफ कोई तोड़फोड़ नहीं की जाएगी। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा और न्यायमूर्ति कुनाल रवि सिंह की खंडपीठ ने की।

जमीयत उलेमा-ए-हिंद की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, संगठन के अध्यक्ष मौलाना महमूद असद मदनी के निर्देश पर मस्जिद की प्रबंध समिति को कानूनी सहायता दी जा रही है। मस्जिद की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता शशि नंदन और अधिवक्ता-ऑन-रिकॉर्ड आदित्य परिहार अदालत में पेश हुए, जबकि मोहम्मद ताहिर हकीम और मोहम्मद निजाम पाशा ने भी कानूनी सहायता प्रदान की।

गौरतलब है कि इसी इलाके में टीएमयू के पास स्थित बाबा फौलाद शाह की दरगाह को प्रशासन ने 7 जुलाई को बुलडोजर से ध्वस्त कर दिया था। प्रशासन ने दावा किया था कि दरगाह का निर्माण तालाब की जमीन पर अवैध कब्जा करके किया गया था। मुस्तफा मस्जिद का मामला ऐसे समय में अदालत पहुंचा है, जब प्राधिकरण के नोटिस को लेकर मस्जिद प्रबंधन ने कानूनी चुनौती दी है।

Related posts

Leave a Comment