एआईएमआईएम के वरिष्ठ नेता एवं विधायक अख्तरुल इमान ने महिला आरक्षण कानून में मुस्लिम और दलित महिलाओं के लिए अलग कोटा देने की मांग उठाई है। उन्होंने कहा कि बिना विशेष प्रावधान के अल्पसंख्यक और हाशिए पर रहने वाले समुदायों की महिलाएं राजनीतिक प्रतिनिधित्व में पीछे रह सकती हैं।
ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के बिहार प्रदेश अध्यक्ष इमान ने केंद्र सरकार से अपील करते हुए कहा कि महिला आरक्षण अधिनियम में संशोधन के दौरान इन वर्गों के लिए स्पष्ट आरक्षण सुनिश्चित किया जाना चाहिए। उनके मुताबिक, “सिर्फ सामान्य महिला आरक्षण से सभी वर्गों की समान भागीदारी सुनिश्चित नहीं हो सकती।”
इमान ने कानून में बदलाव के समय को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कई राज्यों में चुनाव नजदीक होने के बीच इस मुद्दे को उठाना राजनीतिक रूप से प्रेरित लग सकता है। उन्होंने भारत का चुनाव आयोग से इस पर ध्यान देने और जांच करने की अपील की।
इमान ने भारतीय जनता पार्टी पर आरोप लगाया कि वह शासन से ज्यादा सत्ता की राजनीति पर ध्यान दे रही है। उन्होंने कहा कि ऐसे फैसले चुनावी लाभ के लिए लिए जा रहे हैं, जिससे महिला मतदाताओं को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है।
बिहार की राजनीति का जिक्र करते हुए इमान ने नीतीश कुमार के पद छोड़ने के बाद संभावित अस्थिरता की आशंका जताई। उन्होंने दावा किया कि राज्य में हालिया राजनीतिक घटनाक्रम जनहित के बजाय सत्ता संघर्ष से प्रेरित हैं।
इमान ने जोर देकर कहा कि महिला आरक्षण कानून को इस तरह लागू किया जाना चाहिए जिससे समाज के सभी वर्गों को उचित प्रतिनिधित्व मिले। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर मुस्लिम और दलित महिलाओं के लिए अलग हिस्सेदारी नहीं दी गई, तो वे राजनीतिक प्रक्रिया में पीछे छूट सकती हैं।

