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धार्मिक आज़ादी को लेकर अमरीकी मानवाधिकार निकाय ने भारत को रेड लिस्ट में डालने की सिफ़ारिश की

अमेरिकी विदेश विभाग से भारत को रेड लिस्ट या विशेष चिंता वाले देशों में रखने की सिफ़ारिश की

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत को मज़बूत राष्ट्र बनाने का सपना देखने वालों ने भारत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूर राष्ट्र बना दिया हैं।

अमेरिकी मानवाधिकार निकाय ने अमरीका के विदेशी विभाग से भारत को रेड लिस्ट या विशेष चिंता वाले देशों की सूची में डालने की सिफ़ारिश की हैं।

अमेरिकी मानवाधिकार निकाय ने धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर भारत पर चिंता भी जाहिर की हैं, इनका मानना हैं कि भारत में धार्मिक आज़ादी कम होती जा रहीं हैं।

अमेरिकी मानवाधिकार निकाय ने धार्मिक स्वतंत्रता अधिकार रैंकिंग जारी करने से एक महीने पहले भारत समेट चार देशों को रेड लिस्ट में शामिल करने की सिफारिश की है।

रेड लिस्ट में भारत के साथ-साथ रूस, सीरिया और वियतनाम को भी शामिल करने की सिफ़ारिश की हैं. इस सूची में भारत के तीन पड़ोसी देश पाकिस्तान, चीन और म्यांमार पहले से ही शामिल हैं।

भारत को रेड लिस्ट में डालने की सिफ़ारिश करने पर भारतीय विदेश मंत्रालय की ओर से कड़ा विरोध जताया गया है. विदेश मंत्रालय ने कहा है कि उसे भारत और उसके संविधान की उतनी समझ नहीं है।

आपको बता दें कि धार्मिक स्वतंत्रता के मामले को लेकर कई बार अमेरिकी राजदूतों ने भारत और पाकिस्तान के बीच अंतर किया है. लेकिन दोनों ही देश भारत और पाकिस्तान पर अपने नागरिकों पर हिंसा करने का आरोप लगता है।

पिछले साल धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर सवाल पूछे जाने पर अमेरिकी राजदूत सीनेटर सैम ब्राउनबैक ने कहा था कि पाकिस्तान सीपीसी (विशेष चिंता वाले देशों) में क्यों है? और भारत क्यों नहीं?

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