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उत्तर प्रदेश: कारतूस रखने के झूठे आरोप में 26 साल बाद बरी हुए सलाहुद्दीन, मुकदमा लड़ने में जिंदगी की आधी कमाई खर्च हो गई

1995 में मुजफ्फरनगर पुलिस ने सलाहुद्दीन को गिरफ्तार किया था

हिंदुस्तान में मुसलमानों को झूठे इल्ज़ाम में फंसा कर जेल में डालने का सिलसिला बहुत पुराना. जिसके कारण मुसलमानों का पूरा भविष्य बर्बाद हो जाता हैं।

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर के रहने वाले सलाहुद्दीन 26 साल बाद कारतूस रखने के झूठे आरोप में बरी हुए।

मुजफ्फरनगर पुलिस ने सलाहुद्दीन को 1995 में चुंगी नंबर दो के समीप मिमलाना रोड से 12 बोर के चार कारतूस रखने के आरोप में गिरफ्तार हुए थे।

गिरफ्तारी के बाद 17 जुलाई 1999 में कोर्ट ने संज्ञान लेते हुए सलाउद्दीन पर आरोप तय कर दिए. तथा पुलिस को सलाउद्दीन के विरुद्ध सुबूत पेश करने के लिए समय दिया।

पुलिस को बार-बार समय दिए जानें पर भी जब पुलिस सलाउद्दीन के विरुद्ध सुबूत पेश नहीं कर सकीं तो अदालत ने 26 साल बाद उनको सबूतों के अभाव में बरी कर दिया।

सलाहुद्दीन का कहना है कि वह छोटा किसान है और पारिवारिक रंजिश के चलते उसे झूठे आरोप में फंसवाया गया था।

सोशल एक्टिविस्ट अशरफ हुसैन के अनुसार “यूपी शामली के सलाउद्दीन को चार कारतूस रखने के आरोप में 1995 में गिरफ्तार किया गया था. अब 26 साल बाद कोर्ट ने उन्हें सबूतों के आभाव में दोषमुक्त करके बरी कर दिया. इस बीच कोर्ट में 250 से अधिक तारीखों में वो हाजिर हुए जिसमें जिंदगी की आधी कमाई खर्च हो गई, और पैरों में जख्म आ गए।”

सोशल एक्टिविस्ट शाहनवाज अंसारी का कहना है कि “ये सलाहउद्दीन हैं, 4 कारतूस रखने के झुटे आरोप में 1995 में मुज़फ़्फ़रनगर पुलिस ने इन्हे गिरफ्तार किया था. गिरफ्तारी के 20 दिन बाद इन्हें ज़मानत तो मिल गई थी. लेकिन इस बेगुनाह को अपनी बेगुनाही साबित करने में 26 साल लग गए. 26 साल में क़रीब 300 तारीखें भुगतनी पड़ी हैं. ये सिस्टम है हमारे देश का।”

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