सम्पादकीय

कोई भी प्रधानमंत्री हो वो सरकारी खजाने से ही पैसा खर्च करते हैं अपनी जेब से नहीं, तो मुफ्त टीके के लिए मोदीजी को धन्यवाद क्यो?

आज कई दिनों बाद रेडियो सुना। एक जिंगल बज रहा था,” मुफ़्त मिला है सबको टीका, धन्यवाद हो मोदी जी का”।

मैं सोच में पड़ गई मुफ़्त में किसको मिला है? मुझे तो नहीं , मैं तो tax भर रही हूं। अपनी कमाई का एक हिस्सा देकर सुविधाएं ले रही हूं। रही बात गरीबों की जो tax नहीं भरते, पर वस्तुओं पर GST तो वो भी देते हैं। फिर धन्यवाद के हकदार तो हम हुए ना?

और धन्यवाद एक आदमी को क्यों? कोई भी सरकार हो , कोई भी प्रधानमंत्री हो वो सरकारी खजाने से ही खर्च करते हैं, अपनी जेब से नहीं। फिर इतना गाना क्यों? इस सरकार का यही समझ नहीं आया मुझे?

मैं पर्सनली मोदी जी को पसंद करती हूं। उनके कुछ कार्यों से खुश भी हूं। पर उनकी ये गाना गाने की आदत मुझे पसंद नहीं। समझ नहीं आता कि प्रधानमंत्री हैं कि राजा हैं? जिनके सम्मान में गुणगान करना ज़रूरी ही है।

पहले कितनी सरकारें आई गई, कुछ न कुछ मुफ्त सबने दिया पर हम आज भी जब बात करते हैं तो सरकार की करते हैं। जैसे फलानी सरकार में ये काम अच्छा हुआ, फलानी सरकार ने कुछ न किया? यहां पॉलिटिकल पार्टीज का ज़िक्र होता था। पर आज कोई भाजपा सरकार नहीं कहता, मोदी सरकार कहता है। ये जो बाकी भाजपा का मंत्रिमंडल क्या मूंगफलियां छीलता है जो सारा क्रेडिट मोदी जी ले जाते हैं?

मेरे बच्चे 5 साल तक पोलियो की दो बूंद मुफ्त पीते रहे। मैं किसी बूथ पर नहीं गई, वालंटियर्स घर आकर पिला जाते थे। कभी सोचा तक नहीं कि ये मुफ्त सुविधा कैसे मिल रही है?

टीवी रेडियो पर बहुत जिंगल सुने, पर उनका नाम नहीं जिन्होंने शुरू किया। एक बात पूछूं ये जो पोलियो की दो बूंद जिंदगी की आज तक मुफ्त मिलती हैं, उसके लिए किसे करना है धन्यवाद? सोच रही हूं अब तो कर दूं। मेरे बच्चे 5 साल तक मुफ़्त सुविधा लेते रहे हैं तो धन्यवाद तो बनता है।

(यह लेखक के अपने विचार है लेखक डॉ. रेखा यादव एक्टीविस्ट है)

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