मध्य प्रदेश के इंदौर में नगर निगम की बैठक के दौरान वंदे मातरम गाने से इनकार करने पर कांग्रेस की दो मुस्लिम पार्षदों—रूबीना इकबाल खान और फौजिया शेख अलीम—के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।
यह मामला 8 अप्रैल को बजट सत्र के दौरान सामने आया, जिसके बाद राजनीतिक और सामाजिक विवाद तेज हो गया।
पुलिस के अनुसार, पार्षदों के इनकार से सदन में तनाव की स्थिति बनी और “सामाजिक व धार्मिक सद्भाव” प्रभावित हुआ। भाजपा के एक पार्षद की शिकायत पर भारतीय न्याय संहिता की धाराओं के तहत दोनों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।
अधिकारियों ने बताया कि दोनों पार्षदों से पूछताछ की गई, जिसमें उन्होंने अपने फैसले के पीछे धार्मिक कारण बताए।
घटना के दौरान फौजिया शेख अलीम ने कथित तौर पर सवाल उठाया कि क्या वंदे मातरम गाना कानूनी रूप से अनिवार्य है, और बाद में सत्र से बाहर चली गईं।
वहीं रूबीना इकबाल खान ने कहा कि उनका धर्म उन्हें यह गीत गाने की अनुमति नहीं देता, हालांकि बाद में उन्होंने अपने बयान के शब्दों पर खेद जताया और किसी की भावना आहत करने का इरादा न होने की बात कही।
इस मुद्दे पर भाजपा पार्षदों ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया और नारेबाजी की। वहीं मोहन यादव ने घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा और इसे स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान का अनादर बताया।
गौरतलब है कि “वंदे मातरम” भारत का राष्ट्रीय गीत है, जबकि “जन गण मन” राष्ट्रीय गान है। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि वंदे मातरम को सम्मान दिया जाता है, लेकिन इसे गाना हर स्थिति में अनिवार्य करने वाला कोई स्पष्ट कानून नहीं है।
यह मामला अब आस्था, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान के बीच संतुलन को लेकर बहस का केंद्र बन गया है। पुलिस ने कहा है कि जांच जारी है और सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

