उत्तर प्रदेश के खोड़ा क्षेत्र में शुक्रवार को जुमा की नमाज के दौरान सांप्रदायिक तनाव देखने को मिला, जब हिंदू रक्षा दल और अन्य हिंदुत्ववादी संगठनों के कार्यकर्ता मस्जिदों के बाहर एकत्र होकर विरोध प्रदर्शन करने लगे। आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान मुस्लिम विरोधी नारे लगाए गए, जिससे नमाज अदा करने आए लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
स्थानीय लोगों के अनुसार, जुमा की नमाज के समय बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी मस्जिदों के आसपास जमा हो गए, जिससे आवागमन प्रभावित हुआ और सामूहिक नमाज बाधित हुई। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में कुछ लोगों को भड़काऊ नारे लगाते हुए भी देखा गया।
स्थिति को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने इलाके में भारी सुरक्षा बल तैनात किया था। डीसीपी धवल जायसवाल समेत वरिष्ठ अधिकारियों ने फ्लैग मार्च किया और संवेदनशील क्षेत्रों में ड्रोन के जरिए निगरानी रखी। इसके बावजूद प्रदर्शनकारियों की भीड़ मस्जिदों के आसपास पहुंच गई।
रिपोर्ट के अनुसार, विरोध प्रदर्शन में हिंदू रक्षा दल, राष्ट्रीय हनुमान दल और अन्य दक्षिणपंथी संगठनों के सदस्य शामिल थे। हिंदू महासभा की नेता रिया किन्नर ने भी प्रदर्शनकारियों का समर्थन करते हुए सार्वजनिक रूप से सामूहिक नमाज का विरोध किया।
इससे पहले हिंदू रक्षा दल के प्रदेश अध्यक्ष ललित शर्मा ने एक वीडियो संदेश में समर्थकों से शुक्रवार की नमाज का विरोध करने की अपील की थी। उनके कुछ बयानों को लेकर भी विवाद खड़ा हो गया है, जिन्हें आलोचक भड़काऊ और सांप्रदायिक तनाव बढ़ाने वाला बता रहे हैं।
यह पूरा घटनाक्रम हाल ही में 17 वर्षीय सूर्य प्रताप चौहान की हत्या के बाद सामने आया है। पुलिस ने मामले के मुख्य आरोपी असद को मुठभेड़ में मार गिराया था, जबकि प्रशासन ने आरोपी के घर को ध्वस्त करने की प्रक्रिया शुरू की और इलाके के कुछ मदरसों को भी नोटिस जारी किए।
मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और सामाजिक संगठनों का कहना है कि किसी एक अपराध के लिए पूरे समुदाय को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है। उनका आरोप है कि हाल की कुछ प्रशासनिक और सामाजिक कार्रवाइयों ने क्षेत्र में भय और असुरक्षा का माहौल पैदा किया है।
वहीं पुलिस प्रशासन का कहना है कि क्षेत्र में शांति और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं और किसी भी प्रकार की सांप्रदायिक हिंसा या उकसावे की कार्रवाई पर कड़ी नजर रखी जा रही है।
फिलहाल खोड़ा क्षेत्र में स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है, हालांकि घटना ने एक बार फिर सांप्रदायिक सौहार्द और धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर बहस को तेज कर दिया है।

