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दलित, आदिवासी और अल्पसंख्यकों के साथ बढ़ रहे उत्पीड़न को लेकर मोदी सरकार के खिलाफ देशव्यापी अभियान चलाएगी कांग्रेस, 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन

कांग्रेस ने दलितों, आदिवासियों, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों के खिलाफ बढ़ रहे कथित उत्पीड़न को लेकर केंद्र की मोदी सरकार के खिलाफ देशव्यापी अभियान चलाने का ऐलान किया है। इस अभियान के तहत 20 जुलाई को दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक विशाल विरोध प्रदर्शन आयोजित किया जाएगा।

यह फैसला कांग्रेस के अनुसूचित जाति विभाग और अल्पसंख्यक विभाग के संयुक्त अधिवेशन में लिया गया। अधिवेशन के बाद आयोजित प्रेस वार्ता में कांग्रेस के अल्पसंख्यक विभाग के चेयरमैन और अनुसूचित जाति विभाग के चेयरमैन ने अभियान की रूपरेखा साझा की।

दोनों नेताओं ने कहा कि भाजपा सरकार के शासन में दलितों, पिछड़ों, आदिवासियों और अल्पसंख्यकों के खिलाफ अत्याचार बढ़े हैं, जिसके विरोध में दोनों विभाग मिलकर राष्ट्रीय स्तर पर जनजागरण अभियान चलाएंगे। उन्होंने बताया कि 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर होने वाले प्रदर्शन में देशभर से दलित और अल्पसंख्यक समाज के सांसद, विधायक और अन्य जनप्रतिनिधि भाग लेंगे।

कांग्रेस नेताओं के अनुसार अभियान की शुरुआत जून के तीसरे सप्ताह में उत्तर प्रदेश की राजधानी में आयोजित एक संयुक्त राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय कार्यक्रम से होगी। इसके बाद विभिन्न राज्यों में कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे और अभियान को जिला तथा ब्लॉक स्तर तक पहुंचाया जाएगा।

प्रेस वार्ता में नेताओं ने कहा कि देश में जहां कहीं भी वंचित वर्गों के उत्पीड़न की घटनाएं सामने आएंगी, वहां दोनों विभागों के पदाधिकारी संयुक्त रूप से पीड़ितों के साथ खड़े होंगे। जरूरत पड़ने पर उन्हें कानूनी, सामाजिक और प्रशासनिक सहायता भी उपलब्ध कराई जाएगी।

इमरान प्रतापगढ़ी ने कहा कि कांग्रेस का उद्देश्य समाज के वंचित और कमजोर वर्गों के बीच यह भरोसा बनाए रखना है कि द्वारा निर्मित संविधान सभी नागरिकों को न्याय और समान अधिकार प्रदान करता है।

वहीं राजेंद्र पाल गौतम ने आरोप लगाया कि दलित, आदिवासी, ओबीसी और अल्पसंख्यक वर्ग के छात्रों के लिए छात्रवृत्ति की आय सीमा केवल ढाई लाख रुपये वार्षिक निर्धारित है, जबकि आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्ग के लिए यह सीमा आठ लाख रुपये है। उन्होंने इसे भेदभावपूर्ण बताते हुए कहा कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वित्त एवं विकास निगमों को पर्याप्त बजट नहीं दिया जाता और ऋण प्राप्त करने की शर्तें भी जटिल हैं।

उन्होंने कहा कि इस अभियान में अल्पसंख्यक विभाग और अनुसूचित जाति विभाग के साथ-साथ आदिवासी, ओबीसी, अति पिछड़ा वर्ग तथा सामान्य वर्ग के गरीब लोगों को भी जोड़ा जाएगा, ताकि इन वर्गों की समस्याओं और मांगों को राष्ट्रीय स्तर पर प्रभावी ढंग से उठाया जा सके।

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