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नागपुर जेल में केरल के मुस्लिम एक्टिविस्ट ने लगाए अपमानजनक तलाशी के आरोप, बोले- ‘सुरक्षा के नाम पर गरिमा से समझौता नहीं’

नागपुर, 5 अगस्त 2026: केरल के 27 वर्षीय कार्यकर्ता और पत्रकार रेजाज सिद्दीक ने नागपुर केंद्रीय जेल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। यूएपीए के तहत विचाराधीन कैदी रेजाज का दावा है कि अदालत या अस्पताल से जेल लौटने के बाद उन्हें बार-बार कपड़े उतारकर तलाशी दी जाती है और निजी अंग दिखाने के लिए मजबूर किया जाता है। उन्होंने इस प्रक्रिया को अमानवीय, अपमानजनक और असंवैधानिक बताया है।

रेजाज के मुताबिक, अदालत जाने से पहले अंडा सेल के भीतर और फिर जेल के मुख्य गेट पर उनकी तलाशी ली जाती है। इसके बाद महाराष्ट्र पुलिस के जवान उन्हें अदालत तक ले जाते हैं, जहां भी वह लगातार पुलिस निगरानी में रहते हैं। उनका कहना है कि 31 जुलाई को अदालत में पेशी के बाद जेल लौटने पर मुख्य गेट के बाहर फिर तलाशी हुई और जेल में प्रवेश करने के बाद उन्हें कपड़े उतारकर तलाशी देने के लिए कहा गया।

उन्होंने अपनी शिकायत में आरोप लगाया कि जेल परिसर में निजता के लिए तीन तरफ से एक अस्थायी ढांचा बना है, लेकिन इसके बावजूद उन्हें जेल कांस्टेबल के सामने पूरी तरह कपड़े उतारने और निजी अंग दिखाने पड़ते हैं। रेजाज का कहना है कि कई बार तलाशी और लगातार पुलिस निगरानी के बावजूद इस तरह की तलाशी का कोई औचित्य नहीं है।

रेजाज ने सवाल उठाया कि अगर प्रतिबंधित सामान जेल में पहुंचने से रोकने के लिए कपड़े उतरवाकर तलाशी जरूरी है, तो जेल कर्मचारियों के लिए भी वही प्रक्रिया क्यों नहीं अपनाई जाती। उन्होंने दावा किया कि जुलाई 2026 में एक जेल कर्मचारी के प्रतिबंधित सामान की तस्करी करते पकड़े जाने की घटना सामने आई थी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि गरीब और राजनीतिक कैदी इस प्रक्रिया का विरोध करने पर अनुशासनहीनता के आरोपों का सामना कर सकते हैं।

कार्यकर्ता ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 का हवाला देते हुए कहा कि जेल में बंद होने के बाद भी व्यक्ति की गरिमा और मौलिक अधिकार समाप्त नहीं होते। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के सुनील बत्रा बनाम दिल्ली प्रशासन फैसले का भी उल्लेख किया और कहा कि जेल की चारदीवारी के भीतर भी संवैधानिक सुरक्षा लागू रहती है।

रेजाज ने कहा कि जेलों में सुरक्षा के लिए आधुनिक तकनीक, सेंसर, डिटेक्टर और अन्य स्क्रीनिंग प्रणालियों का इस्तेमाल किया जा सकता है। उनके मुताबिक, सुरक्षा व्यवस्था ऐसी नहीं होनी चाहिए जिसमें कैदियों को अपने निजी अंग दिखाने के लिए मजबूर किया जाए। उन्होंने साफ कहा कि उनकी मांग सभी कैदियों पर ऐसी तलाशी लागू करने की नहीं, बल्कि इस पूरी प्रक्रिया को खत्म करने की है।

उन्होंने जेलों में नशीले पदार्थों और प्रतिबंधित सामान की समस्या से निपटने के लिए तलाशी और दंड के साथ-साथ नशामुक्ति कार्यक्रम, काउंसलिंग और मनोवैज्ञानिक सहायता की व्यवस्था करने की मांग की। उनका कहना है कि जेलों को सुधार गृह बनाने के लिए कैदियों के साथ-साथ जेल प्रशासन और कर्मचारियों में भी सुधार जरूरी है।

रेजाज को 7 मई 2025 को नागपुर से गिरफ्तार किया गया था और बाद में उन पर यूएपीए तथा भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया। पुलिस ने उन पर प्रतिबंधित संगठनों से कथित संबंध और सोशल मीडिया गतिविधियों से जुड़े आरोप लगाए हैं। रेजाज इन आरोपों को लेकर लगातार आपत्ति जताते रहे हैं। वह मई 2025 से न्यायिक हिरासत में हैं।

रेजाज ने अधिकारियों से नागपुर केंद्रीय जेल में कथित कपड़े उतरवाकर तलाशी की प्रक्रिया को समाप्त करने और ऐसी सुरक्षा व्यवस्था लागू करने की मांग की है, जिसमें कैदियों की सुरक्षा के साथ उनकी मानवीय गरिमा और संवैधानिक अधिकारों की भी रक्षा हो।

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