राजस्थान के अलवर जिले के रघुनाथगढ़ गांव में छापेमारी के दौरान मां की बगल में खाट पर सो रही एक महीने की बच्ची अलीस्बा की कथित तौर पर एक पुलिस अधिकारी के पैर के नीचे कुचलने से मौत हो गई।
जिसके बाद पीड़ित परिवार लगातार न्याय की मांग कर रहा है, इस घटना के से ग्रामीणों में काफी गुस्सा भी है, घटना की जानकारी मिलने पर पीड़ित परिवार से मिलने CPIM का एक प्रतिनिधिमंडल वृंदा करात के नेतृत्व में पहुंचा. जिसमें राजस्थान के सचिव किशन पारीख, सुमित्रा चोपड़ा और रईसा शामिल थीं।
प्रतिनिधिमंडल ने पीड़ित परिवार के साथ एकजुटता व्यक्त करते हुए त्वरित और निष्पक्ष न्याय की मांग की।
CPIM द्वारा ज़ारी बयान में बताया गया है कि, यह घटना 2 मार्च को सुबह 6 बजे हुई जब पुलिसकर्मियों के एक समूह ने इमरान के मामूली घर की बाहरी दीवार को जबरदस्ती तोड़ दिया। जब माँ रजीदा ने दरवाजा खोला, तो उसके साथ पुरुष अधिकारियों ने मारपीट की और उसे बाहर खींच लिया।
जूते पहने हुए पुलिसकर्मी फिर उस बिस्तर पर कूद गए, जहां शिशु सो रहा था, उसे कुचल दिया, जिससे उसकी तत्काल मौत हो गई।
यह भयावह कृत्य गरीब और हाशिए पर पड़े परिवारों की दुर्दशा को उजागर करता है, जो भाजपा-राज्य सरकार द्वारा चलाए जा रहे मुस्लिम विरोधी एजेंडे के कारण और भी बदतर हो गया है।
CPIM की मांग है कि, हत्या के आरोप में शामिल सभी पुलिसकर्मियों को तत्काल गिरफ्तार किया जाए, घटना के लिए जिम्मेदार थाना प्रभारी को तत्काल निलंबित करने के साथ ही सख्त सजा दी जाए।
प्रभावित परिवार को तत्काल मुआवजा दिया जाए एवं कानून प्रवर्तन द्वारा इस तरह की अवैध और क्रूर कार्रवाइयों को रोकने के उपाय किए जाएं।