ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) ने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के कार्यकर्ताओं पर दिल्ली विश्वविद्यालय के आर्ट्स फ़ैकल्टी में आयोजित एक सामाजिक न्याय कार्यक्रम को बाधित करने का आरोप लगाया है।
आरोप है कि आइसा (AISA) द्वारा आयोजित ‘समता दिवस’ — पीपुल्स लिटरेचर फेस्टिवल के दौरान, जब प्रसिद्ध इतिहासकार प्रो. एस. इरफान हबीब मंच से बोल रहे थे, तब ABVP कार्यकर्ताओं ने मंच पर हमला किया, उन पर पानी फेंका और यहां तक कि डस्टबिन भी उछाल दी। इस दौरान हिंसक और धमकी भरे नारे भी लगाए गए।
यह हमला समानता, सामाजिक न्याय और हाशिए पर पड़े समुदायों की आवाज़ों के लिए समर्पित मंच पर पूर्व नियोजित और संगठित हमला था।
AISA द्वारा जारी प्रेस रिलीज के मुताबिक, छात्रों ने साहसपूर्वक इस गुंडागर्दी का विरोध किया, जिसके बाद ABVP कार्यकर्ताओं को पीछे हटना पड़ा। इस घटना ने एक बार फिर ABVP की असली राजनीति को उजागर किया है, जो बहस से डरती है, सामाजिक न्याय से दुश्मनी रखती है और हाशिए के समुदायों की किसी भी आवाज़ को हिंसा के ज़रिए दबाना चाहती है।
AISA ने आरोप लगाया कि ABVP की राजनीति कभी भी छात्रों के हित में नहीं रही है, बल्कि यह असहमति को दबाने, प्रगतिशील आवाज़ों को डराने और विश्वविद्यालयों को ज्ञान के केंद्र की बजाय भय के केंद्र में बदलने की कोशिश करती है।
AISA ने कहा कि ‘समता दिवस’ पर किया गया यह हमला एक लोकतांत्रिक विश्वविद्यालय की अवधारणा पर सीधा हमला है। संगठन ने स्पष्ट किया कि वह इस तरह की धमकियों से डरने वाला नहीं है। AISA ने कहा, “हम न तो डरेंगे और न ही चुप रहेंगे।
हम ABVP द्वारा किए जा रहे सांप्रदायिक, सामाजिक न्याय विरोधी और अपमानजनक हमलों का हर स्तर पर विरोध करेंगे।” AISA ने कहा कि विश्वविद्यालय छात्रों के हैं — संवाद, बहस और समानता के संघर्ष के लिए — न कि सत्तावादी राजनीति के इशारे पर काम करने वाली हिंसक भीड़ के लिए।
AISA ने कहा कि डस्टबिन और नारों से सामाजिक न्याय को नहीं रोका जा सकता।
संगठन ने दोहराया कि प्रतिरोध और मजबूत होगा।

