सम्पादकीय

20 सालों से लाखों अफ़ग़ानी मर्द,बूढ़े,बच्चियों का क़त्ल-ए-आम करने वाले अमेरिका को अब अफ़ग़ान की मुस्लिम औरतों की बहुत फ़िक्र सता रही है

अमेरिका पिछले 20 सालों से अफ़ग़ानिस्तान में जम्हूरियत बचाने के नाम पर लाखों अफ़ग़ानी अवाम का क़त्ल-ए-आम कर चुका है।

अमेरिका का शिकार अफ़ग़ान की आम अवाम हो रही थी या तालिबान हो रहे थे। मर तो अफ़ग़ानी अवाम रही थी न? तालिबान भी तो अफ़ग़ानिस्तान के ही शहरी हैं? या वो कहीं दूसरी जगह प्लांट किये गए हैं?

पिछले 20 सालों में मग़रिबी मीडिया हो या बर्रे सग़ीर की मीडिया मंडी हो, क्या कभी इन्होंने दुनिया को ये दिखाया कि अफ़ग़ान में अमेरिका ने कितने बूढ़े, बच्चों, ख़्वातीन का क़त्ल किया?

अफ़ग़ानिस्तान में मिलियन से ज़्यादा मुसलमानों का क़त्ल-ए-आम करने वाला कौन है? इन बीस सालों के दौरान दुनिया को वहां की ख़्वातीन की फ़िक्र आपको क्यों नहीं हुई?

ये जो फेसबुक पर बैठकर कल से अफ़ग़ान की ख़्वातीन-बच्चियों की तालीम और आज़ादी पर आंसू बहा रहे हैं। उनसे पूछिये तुम्हें आज से पहले ये बात क्यों नहीं समझ आयी थी? क्या आज से पहले अफ़ग़ानिस्तान में “सब चंगा सी?”

माने अमेरिका जो कह दे वही सही? 20 सालों से लाखों अफ़ग़ानी मर्द, बूढ़े, बच्चे, बच्चियों का क़त्ल-ए-आम करने वाले अमेरिका को अब कल से अफ़ग़ान की मुस्लिम औरतों की बहुत फ़िक्र सता रही है।

अमेरिका के साथ साथ भारत में बैठे कुछ बुद्धजीवी भी अफ़ग़ान की महिलाओं को लेकर बहुत चिंतित हैं। कल से पहले इन्हें अफ़ग़ान की महिलाओं पर लिखी एक पोस्ट आपको देखने को नहीं दिखेगी।

अरे भाई दुनिया में सबसे ज़्यादा रेप अमेरिका में होता है। भारत दुनिया का दूसरा मुल्क है जहां सबसे ज़्यादा रेप होता है। ये मैं नहीं कह रहा हूँ आप जिस अमेरिका की कही बात को आसमान से नाज़िल आयत समझते हैं उसी अमेरिकी मीडिया का डाटा है। तो आप अफ़ग़ानिस्तान की फ़िक्र छोड़कर अमेरिका और भारत में क्रांति की मशाल जलाइए।

यहां की बहन बेटियों के लिए लिखिये आवाज़ उठाइए। भारत में हर घण्टे 4 बहन-बेटियों का रेप होता है। अमेरिका जाने के पैसे नहीं हैं तो भारत में रेप रोकने पर क्रांति कीजिए और अगर अल्लाह ने पैसा दिया है तो अमेरिका जाकर रेप रोकने के लिये क्रांति की मशाल जलाइए।

बाक़ी जिन्होंने दुनिया की दो सुपर पॉवर मुल्क सोवियत संघ (रूस) और यूनाइटेड स्टेट से निपट लिया वह अपने मसायल से भी निपट लेंगे। हमें ज़रूरत है अपनी फटी सिलने की। समझ रहे हैं न?

नोट- अफ़ग़ानिस्तान-तालिबान पर मेरा वही स्टैंड है जो हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री आदरणीय नरेंद्र मोदी जी की सरकार का स्टैंड है।

(यह लेखक के अपने विचार हैं लेखक शाहनवाज़ अंसारी सोशल एक्टिविस्ट हैं)

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