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मध्य प्रदेश: भगवाधारियों के डर से होटल वालों ने मुस्लिम लड़का और हिंदू लड़की को ठहरने के लिए नहीं दिया कमरा

इंटर रिलिजन पहचान होने के कारण खंडवा में काफ़ी होटल मालिकों ने कमरा देने से कर दिया मना

मध्य प्रदेश में कट्टरपंथी हिंदुत्ववादी संगठन के लोगों का आतंक बढ़ता ही जा रहा हैं. जिसके कारण अब दो अलग अलग धर्म के जोड़ों को होटलों में कमरा भी नहीं मिलता है।

मामला मध्य प्रदेश के खंडवा का हैं जहां पर भोपाल की एक हिंदी नाम की युवती और बुरहनपुर का ऊर्दू नाम का लड़का शुक्रवार के दिन खंडवा घूमने गए थे।

जब उन्होंने ठहरने के लिए होटल में कमरा लेने की कोशिश की तो इंटर रिलिजन आइडेंटिटी कार्ड की वजह से काफ़ी होटलों ने उन्हें कमरा देने से मना कर दिया.

काफ़ी मशक्कत के बाद आख़िर में एक होटल में उन्हें कमरा मिल गया जिसके बाद इस घटना में एक और मोड़ आ जाता हैं।

पत्रकार कासिफ काकवी के अनुसार “कमरा मिलने के बाद कोई उनकी मुखबिरी भागवधारियों से कर देता हैं. और थोड़ी देर में कुछ लोग नारंगी गमछे के साथ होटल पहुंच कर हंगामा करने लगते हैं. विवाद बढ़ता देख होटल वाला पुलिस को सूचना दे देता हैं. जिसके बाद दरोगा बलजीत सिंह बिसेन उन्हें तुरंत कोतवाली थाने ले जाते हैं।

थाने में बात चीत के दौरान यह पता चलता हैं कि लड़की अपनी मर्जी से ऊर्दू नाम वाले लड़के के साथ रुकी है वह MBA है और उसे कोई भी बहला फुसलाकर यहां नहीं लाया है. इस बात पर भगवाधारियों की भड़क उठते हैं तथा TI बलजीत सिंह से उलझ जाते हैं और पुलिस से होटल मालिक पर कार्रवाई करने की मांग करने लगते हैं।

इस बात पर दारोगा ने भगवाधारियों को समझाते हुए कहा कि लड़की अपनी मर्जी से रुकी हुई है. उसने किसी भी तरह की शिकायत नहीं की. यह उनके प्राइवेसी का मामला है. कानून की नजर में यह कोई गुनाह नहीं है कोई भी बालिग अपनी मर्जी से कहीं भी आ जा सकता हैं।

इस बात पर भगवाधारियों ने उनके परिवार वालों को बुलाने की मांग शुरू कर दी. दरोगा जी बोले, उनके परिजनों को जबरदस्ती नहीं बुलाया जा सकता. बदनामी के डर से अगर वह कोई गलत कदम उठा ले तो हम क्या कर लेंगे, कौन जिम्मेदार होगा इनकी मौत का? कुल मिला कर दरोगा जी ने भगवाधारियों की नहीं चलने दी।

इसके बाद भगवाधारियों को लगा कि अब यहां पर दाल नहीं गले गी. इसलिए वह चुपचाप वहां से चले गए।

अब सवाल यह उठता हैं आखिर यह लोग क्यों किसी की प्राइवेसी से खिलवाड़ करते हैं. क्या कानून को उन भगवाधारियों पर कार्यवाही नहीं करनी चाहिए थीं. जो लोगों के ‘जीवन जीने के अधिकार’ को छीन रहें हैं?

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