अमेरिका के कई शहरों में भारतीय-अमेरिकियों ने भारत में मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने और विरोध प्रदर्शन कर रहे छात्रों, पत्रकारों तथा नागरिकों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई के विरोध में प्रदर्शन किया। इंडियन अमेरिकन मुस्लिम काउंसिल (आईएएमसी) की ओर से 12 अक्टूबर 2026 को जारी प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, मैसाचुसेट्स, न्यू जर्सी, जॉर्जिया, टेक्सास और कैलिफोर्निया में ये प्रदर्शन आयोजित किए गए। इनमें मुस्लिम, हिंदू, दलित और दक्षिण एशियाई समुदायों से जुड़े संगठनों ने हिस्सा लिया और भारत में लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा की मांग उठाई।
आईएएमसी के मुताबिक, ये प्रदर्शन भारत में चुनाव आयोग की विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के खिलाफ चल रहे आंदोलनों के समर्थन में आयोजित किए गए। संगठन ने आरोप लगाया कि एसआईआर के तहत मतदाता सूची से लगभग 13.3 करोड़ लोगों के नाम हटाए गए हैं और मुस्लिमों समेत अन्य अल्पसंख्यक समुदायों पर इसका असमान प्रभाव पड़ा है। प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे, मतदाता सूची से गलत तरीके से हटाए गए पात्र मतदाताओं के नाम बहाल करने और एसआईआर प्रक्रिया रोकने की मांग की।
प्रेस विज्ञप्ति में दिल्ली में विरोध प्रदर्शन कर रहे लोगों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई का भी जिक्र किया गया। आईएएमसी ने आरोप लगाया कि हजारों शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया, छात्रों को ट्रेन और बसों से उतारा गया तथा विरोध प्रदर्शनों की रिपोर्टिंग कर रहे पत्रकारों को भी हिरासत में लेकर उनके साथ मारपीट की गई। संगठन ने यह भी दावा किया कि प्रदर्शन के नेताओं को एक व्यावसायिक विमान से उतार लिया गया। आईएएमसी ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय की ओर से मनमाने ढंग से हिरासत में लिए गए लोगों की रिहाई की मांग का भी उल्लेख किया।
मैसाचुसेट्स के बोस्टन में हार्वर्ड स्क्वायर पर आयोजित प्रदर्शन में लोगों ने हिस्सा लिया। इसका आयोजन आईएएमसी के बोस्टन चैप्टर, बोस्टन साउथ एशियन कोएलिशन और बोस्टन स्टडी ग्रुप ने किया। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस कार्रवाई रोकने, महिला प्रदर्शनकारियों के साथ कथित यौन उत्पीड़न के आरोपों का सामना कर रहे पुलिस अधिकारियों को निलंबित करने और बिहार तथा पश्चिम बंगाल के चुनावों में कथित अनियमितताओं की जांच कराने की मांग की।
न्यू जर्सी के इसेलिन में प्रदर्शनकारियों ने एसआईआर के तहत नाम हटाए जाने का विरोध करते हुए सभी पात्र मतदाताओं के वोट बहाल करने की मांग की। जॉर्जिया के अटलांटा में आईएएमसी के नेतृत्व में नेशनल सेंटर फॉर सिविल एंड ह्यूमन राइट्स के बाहर लगभग दो घंटे तक प्रदर्शन हुआ। इसमें हिंदूज फॉर ह्यूमन राइट्स, आंबेडकरवादी कार्यकर्ताओं और अन्य संगठनों के सदस्यों ने भाग लिया। वहीं, टेक्सास के डलास और कैलिफोर्निया के फ्रेमोंट में भी प्रदर्शन आयोजित किए गए। इन प्रदर्शनों में एसआईआर रोकने, पुलिस कार्रवाई के लिए जवाबदेही तय करने और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग उठाई गई।
आईएएमसी के अध्यक्ष मोहम्मद जव्वाद ने कहा कि हिंदू, मुस्लिम और दलित समुदायों के लोगों का एक साथ आना भारतीय लोकतंत्र और मताधिकार की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने हिरासत में लिए गए लोगों की रिहाई, ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची से गलत तरीके से हटाए गए नामों की बहाली तक संघर्ष जारी रखने की बात कही।
आईएएमसी ने अपनी मांगों में सभी हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारियों और पत्रकारों की तत्काल रिहाई, उनके खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों को वापस लेने, कथित पुलिस हिंसा की जांच, एसआईआर पर रोक और गलत तरीके से हटाए गए पात्र मतदाताओं के नाम बहाल करने की मांग की है। संगठन ने भारत सरकार से बिहार और पश्चिम बंगाल के चुनावों में कथित अनियमितताओं की जवाबदेही तय करने की मांग भी की। इसके अलावा, उसने अमेरिकी सरकार और कांग्रेस से भारत में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई की सार्वजनिक रूप से निंदा करने और इस मुद्दे को भारत सरकार के समक्ष उठाने की अपील की।

