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राजस्थान कैबिनेट ने UCC विधेयक को दी मंजूरी, बहुविवाह पर प्रतिबंध का प्रस्ताव

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की अध्यक्षता में राजस्थान मंत्रिमंडल ने समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक, 2026 को मंजूरी दे दी है। प्रस्तावित कानून में सभी समुदायों के लिए विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े मामलों में समान कानूनी प्रावधान लागू करने की बात कही गई है। विधेयक को 20 अगस्त से शुरू होने वाले राजस्थान विधानसभा के मानसून सत्र में पेश किए जाने की संभावना है।

प्रस्तावित यूसीसी में बहुविवाह पर प्रतिबंध लगाने का प्रावधान शामिल है। साथ ही, कानून लागू होने के बाद होने वाले सभी विवाहों का 60 दिनों के भीतर पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। हालांकि, विवाह का पंजीकरण नहीं कराने पर विवाह को अमान्य नहीं माना जाएगा। नियमों का पालन नहीं करने पर 10 हजार रुपये तक का जुर्माना और नोटिस के बाद भी अनुपालन नहीं करने पर 25 हजार रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान प्रस्तावित है।

विधेयक में लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर भी प्रावधान किए गए हैं। ऐसे संबंधों की शुरुआत और समाप्ति की जानकारी दर्ज कराने या लिखित रूप से देने की व्यवस्था प्रस्तावित है। सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य लिव-इन संबंधों में रहने वाले दोनों पक्षों के अधिकारों की सुरक्षा करना है। इसके अलावा तलाक के पंजीकरण और वैवाहिक विवादों के समाधान के लिए भी प्रक्रिया निर्धारित की जाएगी।

प्रस्तावित कानून में पुत्र और पुत्रियों को समान उत्तराधिकार अधिकार देने की बात कही गई है। यानी धर्म या व्यक्तिगत कानून की परवाह किए बिना संपत्ति के उत्तराधिकार में बेटों और बेटियों के लिए समान अधिकार का प्रावधान होगा। बिना वसीयत के मृत्यु होने की स्थिति में उत्तराधिकार को लेकर भी नियम निर्धारित किए जाएंगे।

संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल के मुताबिक, विधेयक का मसौदा उत्तराखंड, गुजरात और असम समेत अन्य राज्यों में लागू या प्रस्तावित यूसीसी के प्रावधानों का अध्ययन करने के बाद तैयार किया गया है। हालांकि, प्रस्तावित कानून अनुसूचित जनजातियों और संविधान के तहत पारंपरिक अधिकारों से संरक्षित समुदायों पर लागू नहीं होगा।

राजस्थान सरकार के इस फैसले के बाद राज्य उन भाजपा शासित राज्यों की सूची में शामिल हो गया है जो समान नागरिक संहिता लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। अब विधेयक को विधानसभा में पेश किए जाने के बाद उस पर चर्चा और बहस होगी। विधानसभा से पारित होने के बाद ही यह कानून का रूप ले सकेगा।

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