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पांच महीनों में सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान 55 से अधिक सफाई कर्मचारियों की मौत: रिपोर्ट

नई दिल्ली: मानवाधिकार संगठन दलित आदिवासी शक्ति अधिकार मंच (DASAM) ने दावा किया है कि फरवरी से जून 2026 के बीच देशभर में सीवर, सेप्टिक टैंक और अन्य बंद स्वच्छता स्थानों की सफाई के दौरान 55 से अधिक सफाई कर्मचारियों की मौत हुई।

संगठन का कहना है कि यह स्थिति तब भी बनी हुई है, जबकि मैनुअल स्कैवेंजिंग पर कानूनी प्रतिबंध है और सर्वोच्च न्यायालय समय-समय पर इसे रोकने के निर्देश दे चुका है।

रिपोर्ट के अनुसार, पांच महीनों में दर्ज मौतों में जून में 18, मार्च में 20, अप्रैल में 10, मई में 6 और फरवरी में 1 मौत हुई। संगठन का आरोप है कि कई मामलों में इन मौतों को मैनुअल स्कैवेंजिंग से जुड़ी मौत के बजाय सामान्य कार्यस्थल दुर्घटना या जहरीली गैस से हुई दुर्घटना के रूप में दर्ज किया जाता है, जिससे जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय नहीं हो पाती।

रिपोर्ट में कहा गया है कि सूरत, बेंगलुरु, लुधियाना, फरीदाबाद, दिल्ली और लखनऊ सहित कई शहरों में सफाई कर्मचारियों की मौतें हुईं। संगठन का आरोप है कि कर्मचारियों को बिना ऑक्सीजन सिलेंडर, गैस डिटेक्टर, सुरक्षा हार्नेस, श्वास यंत्र और अन्य सुरक्षा उपकरणों के जहरीले सीवर और सेप्टिक टैंकों में उतारा जाता है।

दासम ने दिल्ली के मुंडका में 26 जून को हुई घटना का भी उल्लेख किया, जिसमें तीन सफाई कर्मचारियों की जहरीली गैस के कारण मौत हो गई थी। संगठन का आरोप है कि श्रमिकों को पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था के बिना सेप्टिक टैंक में उतारा गया था।

संगठन ने मांग की है कि प्रत्येक मौत पर एफआईआर दर्ज की जाए, पीड़ित परिवारों को 30 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए, सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई का पूर्ण मशीनीकरण किया जाए तथा दोषी ठेकेदारों और अधिकारियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। हालांकि, यह सभी दावे दासम की रिपोर्ट पर आधारित हैं और इस संबंध में सरकारी पक्ष का बयान सामने नहीं आया है।

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