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707 गवाहों वाले UAPA मामले पर सुप्रीम कोर्ट की कर्नाटक सरकार को फटकार, कहा- मुकदमा वर्षों तक नहीं खिंच सकता

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक सरकार की अभियोजन प्रक्रिया पर कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा है कि किसी आरोपी को वर्षों तक हिरासत में रखकर मुकदमे को अनिश्चितकाल तक लंबा नहीं खींचा जा सकता। अदालत बुधवार को UAPA के तहत दर्ज एक मामले में सितंबर 2022 से हिरासत में चल रहे शाहिद खान की जमानत याचिका पर सुनवाई कर रही थी।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने मामले में 707 गवाहों की सूची पर सवाल उठाया। अभियोजन के मुताबिक इनमें 64 संरक्षित गवाह भी शामिल हैं। अदालत ने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में गवाहों की गवाही दर्ज कराने की योजना मौजूदा न्यायिक व्यवस्था में व्यावहारिक नहीं लगती। न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची ने अभियोजन की योजना को बेहद अव्यावहारिक बताते हुए सवाल किया कि इतनी बड़ी संख्या में गवाहों के साथ मुकदमा उचित समय में कैसे पूरा होगा।

सुप्रीम कोर्ट ने विशेष अदालत के भारी कार्यभार पर भी चिंता जताई। अदालत को बताया गया कि संबंधित न्यायाधीश करीब 97 UAPA मामलों की सुनवाई कर रहे हैं। इस पर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि किसी एक न्यायाधीश पर इतने अधिक मामलों का बोझ नहीं डाला जा सकता। उन्होंने अधिक विशेष अदालतें गठित करने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि मामलों की संख्या बढ़ने पर अदालतों की संख्या भी बढ़ाई जानी चाहिए।

पीठ ने कर्नाटक सरकार के उस तर्क को भी स्वीकार नहीं किया जिसमें आरोपियों की ओर से दाखिल जमानत या रिहाई याचिकाओं को मुकदमे में देरी का कारण बताया गया था। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि कोई गवाह उपलब्ध है तो उसकी गवाही दर्ज की जानी चाहिए और केवल जमानत याचिका दाखिल होने के कारण कार्यवाही रोकना उचित नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने अभियोजन को मुकदमे को आगे बढ़ाने पर ध्यान देने की हिदायत दी।

शाहिद खान के वकील वरिष्ठ अधिवक्ता आदित्य सोंधी ने अदालत को बताया कि उनके मुवक्किल सितंबर 2022 से हिरासत में हैं और करीब चार साल जेल में बिता चुके हैं। उन्होंने यह भी दलील दी कि इसी तरह के आरोपों का सामना कर रहे नौ अन्य आरोपियों को पहले ही जमानत मिल चुकी है। अभियोजन पक्ष का आरोप है कि मामला कथित PFI साजिश से जुड़ा है और आरोपियों पर युवाओं को कट्टरपंथी बनाने तथा गैरकानूनी गतिविधियों में शामिल होने की योजना का हिस्सा होने के आरोप हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक को मामले की सुनवाई में तेजी लाने के लिए एक अतिरिक्त विशेष अदालत की स्थापना की दिशा में आवश्यक बुनियादी ढांचा और मंजूरियां दो सप्ताह के भीतर पूरी करने का निर्देश दिया। अदालत ने खान के मामले में तीन संरक्षित गवाहों और अन्य महत्वपूर्ण गवाहों की गवाही को प्राथमिकता देने को कहा है। महत्वपूर्ण अभियोजन साक्ष्य तीन महीने के भीतर दर्ज किए जाने हैं। इसके बाद शाहिद खान को दोबारा जमानत के लिए आवेदन करने की स्वतंत्रता होगी। अदालत ने कहा कि मकसद आरोपी को वर्षों तक हिरासत में रखना नहीं, बल्कि तेज और निष्पक्ष सुनवाई सुनिश्चित करना है।

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