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इलाहबाद हाईकोर्ट का फ़ैसला, CAA आंदोलन के दौरान मुस्लिम नौजवानों पर NSA की कार्यवाही गलत थी, 6 नौजवानों को 1 साल बाद छोड़ा

NSA के तहत गिरफ्तार दो लोगों के अब्बा का इंतेकाल होने पर भी नहीं मिली थीं ज़मानत

उत्तर प्रदेश में कानून का राज बताने वालो मुस्लिमों पर हो रहें जुल्म के खिलाफ़ हमेशा खामोश रहते हैं. ख़ामोशी की वजह भी साफ़ हैं क्योंकि जुल्म उनके ही इशारों पर हो रहा है।

उत्तर प्रदेश के मऊ में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) आंदोलन के दौरान पुलिस ने 6 मुस्लिम नौजवानों को नैशनल सिक्योरिटी एक्ट (NSA) के तहत गिरफ्तार किया था।

जिनको हाल ही में इलाहबाद हाईकोर्ट ने यह कहते हुए छोड़ दिया कि इन लोगों पर एनएसए की कार्यवाही गलत थीं. इनका ऐसा कोई जुर्म नहीं था जो इन लोगों पर एनएसए लगाया जाएं।

इलाहबाद हाईकोर्ट का फैसला इनकी गिरफ्तारी के ठीक एक साल बाद आया हैं. अब सवाल यह हैं कि इनके एक साल की भरपाई कौन करेगा?

राष्ट्रीय उलमा काउंसिल के प्रवक्ता तलहा आमिर रशदी के अनुसार “मऊ में CAA-NRC प्रोटेस्ट मामले में 6 नौजवानों पे लगा NSA खारिज.
मऊ के 6 नौजवानों पर CAA प्रोटेस्ट के मामले में मऊ जिला प्रशासन ने रासुका लगा उन्हें लगभग एक साल तक जेल में बंद रखा था. इस दौरान इनमे से 2 लड़को के वालिद का सदमे से इंतेक़ाल भी हो गया और वो अपने वालिद के जनाजे में भी शरीक न हो सके।

आज हाई कोर्ट इलाहाबाद ने सभी 6 लोगों पे की गई रासुका की कार्यवाही को खारिज कर दिया. सवाल ये है कि एक जो इनको जेल में बंद रखा गया उसका हिसाब कौन देगा. क्या कोर्ट को शाषन/प्रशासन से इन्हें मुआवज़ा देने का आदेश नही देना चाहिए जबकि ये रासुका की अवधि ही पूरी कर चुके?

सोशल एक्टिविस्ट अशरफ़ हुसैन ने भी पुलिस की कार्यवाही पर सवाल उठाते हुए कहा हैं कि “मऊ में CAA प्रोटेस्ट के बाद AIMIM जिलाध्यक्ष समेत 6 लोगों को NSA के तहत क़रीब एक साल जेल में रहना पड़ा था. कल इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सभी 6 लोगों पर की गई NSA की कार्यवाही को गलत ठहराते हुए खारिज कर दिया है. सवाल ये है कि उन्हें एक साल जेल में क्यों रखा गया? क्या सरकार मुआवजा देगी?

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