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ग्रेट निकोबार परियोजना के खिलाफ लंदन में प्रदर्शन, अडानी से संबंध खत्म करने की मांग; शोम्पेन आदिवासियों के अस्तित्व पर खतरे की चेतावनी

लंदन स्थित साइंस म्यूजियम के बाहर प्रदर्शनकारियों ने अडानी समूह के साथ अपने प्रायोजन संबंध खत्म करने की मांग की। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि भारत के ग्रेट निकोबार द्वीप पर प्रस्तावित विशाल विकास परियोजना से वहां रहने वाले मूल निवासी शोम्पेन समुदाय के अस्तित्व पर गंभीर खतरा पैदा हो सकता है। प्रदर्शन का आयोजन आदिवासी अधिकारों के लिए काम करने वाले संगठन सर्वाइवल इंटरनेशनल ने किया, जिसमें पर्यावरण और मानवाधिकार संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी हिस्सा लिया।

प्रदर्शनकारियों ने साइंस म्यूजियम के निदेशक सर इयान ब्लैचफोर्ड और अडानी समूह के प्रमुख गौतम अडानी का नाम लेते हुए नारे लगाए। उनका आरोप है कि म्यूजियम द्वारा अडानी समूह से प्रायोजन स्वीकार करना कंपनी की छवि को बेहतर दिखाने का माध्यम बन रहा है, जबकि ग्रेट निकोबार परियोजना से पर्यावरण और स्थानीय आदिवासी समुदायों को नुकसान पहुंचने की आशंका है।

सर्वाइवल इंटरनेशनल के अनुसार, शोम्पेन समुदाय के लोग हजारों वर्षों से ग्रेट निकोबार द्वीप पर रहते आए हैं। वे मुख्य रूप से खानाबदोश शिकारी-संग्रहकर्ता हैं और उनकी आबादी लगभग 300 होने का अनुमान है। समुदाय के अधिकांश लोग बाहरी दुनिया के संपर्क से दूर रहते हैं। कार्यकर्ताओं का कहना है कि द्वीप के वर्षावनों, नदियों और प्राकृतिक संसाधनों को नुकसान पहुंचने से शोम्पेन समुदाय की आजीविका, संस्कृति और अस्तित्व प्रभावित हो सकता है।

ग्रेट निकोबार परियोजना के तहत एक विशाल बंदरगाह, सैन्य अड्डे, औद्योगिक क्षेत्र और अन्य बुनियादी ढांचे के विकास की योजना है। सर्वाइवल इंटरनेशनल के मुताबिक, अडानी समूह ने प्रस्तावित बंदरगाह के निर्माण में रुचि दर्ज कराई है, लेकिन अभी उसे इसका ठेका नहीं मिला है। संगठन ने यह भी दावा किया कि परियोजना के लिए बड़े पैमाने पर जंगलों को काटा जा सकता है और लगभग एक करोड़ पेड़ों की कटाई की आशंका है।

वर्ष 2024 में नरसंहार अध्ययन से जुड़े 39 विद्वानों ने चेतावनी दी थी कि यदि परियोजना लागू हुई तो शोम्पेन समुदाय के अस्तित्व पर विनाशकारी असर पड़ सकता है। हालांकि, नरसंहार की आशंका जताना विशेषज्ञों की चेतावनी है, किसी न्यायिक निष्कर्ष का उल्लेख नहीं।

सर्वाइवल इंटरनेशनल की कार्यकारी निदेशक कैरोलिन पियर्स ने कहा कि दुनिया को ग्रेट निकोबार परियोजना से जुड़े खतरों के बारे में चेतावनी दी जा चुकी है। उन्होंने साइंस म्यूजियम से अडानी समूह का प्रायोजन स्वीकार करना बंद करने और आदिवासी समुदाय के अधिकारों को प्राथमिकता देने की अपील की।

प्रदर्शन में शामिल इंडिया लेबर सॉलिडैरिटी के प्रतिनिधि प्रवीण कुमार ने कहा कि भारत में आदिवासी जमीनों पर कॉरपोरेट परियोजनाओं के विस्तार के दौरान जंगलों के विनाश, स्थानीय समुदायों की सहमति की अनदेखी और लोगों के विस्थापन जैसी समस्याएं सामने आती रही हैं। प्रदर्शनकारियों ने साइंस म्यूजियम से मांग की कि वह अडानी समूह के साथ अपने संबंध समाप्त करे और शोम्पेन समुदाय के अधिकारों की रक्षा के पक्ष में खड़ा हो।

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