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दिल्ली: सुनहरी बाग मस्जिद के विध्वंस पर रोक लगाने के लिए मौलाना असद मदनी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखा पत्र

जमीअत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद असद मदनी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर नई दिल्ली में राजपथ पर स्थित सुनहरी बाग मस्जिद के संभावित विध्वंस पर अपनी कठोर आपत्ति व्यक्त की है।

मौलाना मदनी ने अपने पत्र में प्रधानमंत्री को संबोधित करते हुए कहा है कि हम नई दिल्ली नगर पालिका परिषद (एनडीएमसी) द्वारा मस्जिद सुनहरी बाग को हटाने के संबंध में जनता की राय मांगने वाली अधिसूचना पर आपत्ति व्यक्त करते हैं। हम यह समझते हैं कि इस तरह की कार्रवाई से हमारी साझी विरासत को गंभीर नुकसान पहुंचाएगी।

यह मस्जिद देश के प्रमुख स्थान पर दो सौ वर्षों से स्थापित है जो हमारे देश की समृद्ध सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत की गवाह है। हमारा देश अनेकता में एकता की मिसाल है और सह-अस्तित्व के सिद्धांतों से समृद्ध है। अपनी सुंदरता और भव्यता के साथ निर्मित, यह मस्जिद न केवल आसपास के लोगों के लिए इबादत की जगह है, बल्कि एक गौरवशाली विरासत का भी महत्व रखती है। इसके अलावा, अक्टूबर 2009 में जारी अधिसूचना के अनुसार, यह मस्जिद ग्रेड-3 के धरोहर भवनों में शामिल है।

हम आपसे अनुरोध करते हैं कि आप स्वयं इस मामले का संज्ञान लें और मस्जिद सुनहरी बाग की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाएं। हमें विश्वास है कि इस मामले में आपका हस्तक्षेप इस देश की सांस्कृतिक पहचान की रक्षा के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को मजबूती देगा।

जमीअत उलमा-ए-हिंद के एक प्रतिनिधिमंडल ने संबंधित मस्जिद का दौरा किया

इस बीच, जमीअत उलमा-ए-हिंद के एक केंद्रीय प्रतिनिधिमंडल ने आज दोपहर जमीअत के महासचिव मौलाना हकीमुद्दीन कासमी के नेतृत्व में सुनहरी बाग मस्जिद पहुंच कर इमाम मौलाना अब्दुल अजीज से मुलाकात की और मस्जिद के संबंध में पूरी स्थिति की जानकारी ली। इमाम साहब ने कहा कि हमारी मस्जिद सरकार के हर सुरक्षा निर्देश का पालन करती है, यहां तक कि संसद सत्र के दौरान यहां जमाअत के साथ (सामूहिक नमाज) का भी आयोजन नहीं किया जाता है। इसके साथ ही, इस मस्जिद के कारण यातायात की कोई समस्या नहीं है। हम केवल अल्लाह से इस मस्जिद की रक्षा करने की प्रार्थना करते हैं।

इस अवसर पर जमीअत उलेमा हिंद के प्रतिनिधिमंडल ने हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया। जमीअत उलमा-ए-हिंद के महासचिव मौलाना हकीमुद्दीन कासमी ने दिल्ली के लोगों से विशेष रूप से अपील की कि वह एनडीएमसी अधिसूचना पर प्रतिक्रिया दें कि उन्हें इस मस्जिद का विध्वंस बिल्कुल पसंद नहीं है।

जामीअत के प्रतिनिधिमंडल में महासचिव मौलाना मौलाना हकीमुद्दीन कासमी के अलावा गय्यूर अहमद कासमी, मौलाना इरफान कासमी, मौलाना मुफ्ती जाकिर हुसैन कासमी, मौलाना ऐहतशाम कासमी और मौलाना अजीमुल्लाह सिद्दीकी शामिल थे।

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