Journo Mirror
India

धार्मिक पहचान के कारण निशाना बनाया गया: मध्य प्रदेश से हिरासत में लिए गए 155 मुस्लिम छात्रों के माता-पिता का आरोप

मध्य प्रदेश के कटनी जिले में 155 मुस्लिम छात्रों और 8 शिक्षकों को हिरासत में लिए जाने का मामला अब विवाद का रूप ले चुका है।

अभिभावकों ने आरोप लगाया है कि बच्चों को उनकी धार्मिक पहचान के आधार पर निशाना बनाया गया, जबकि पुलिस ने इस कार्रवाई को “बाल श्रम और तस्करी की आशंका” से जुड़ा बताया है।

जानकारी के अनुसार, 6 से 15 वर्ष की आयु के ये बच्चे बिहार से महाराष्ट्र और कर्नाटक के स्कूलों और मदरसों में पढ़ाई के लिए जा रहे थे। 11 अप्रैल को कटनी में सरकारी रेलवे पुलिस (GRP) ने उन्हें रोक लिया।

बाद में बच्चों को करीब दो सप्ताह तक जबलपुर और कटनी के आश्रय गृहों में रखा गया और 25 अप्रैल को उन्हें वापस बिहार भेज दिया गया।

बिहार के सीमांचल क्षेत्र, खासकर अररिया में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में अभिभावकों ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि, बच्चों को उनकी धार्मिक पहचान के कारण निशाना बनाया गया, अभिभावकों के पहुंचने के बाद भी रिहाई में देरी की गई और आश्रय गृहों में बच्चों को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया।

अभिभावकों ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच, मुआवजा और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश बनाने की मांग की है।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई बाल तस्करी की आशंका के आधार पर की गई थी। 12 अप्रैल को FIR दर्ज की गई और साथ आए 8 लोगों पर नाबालिगों की तस्करी से संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया गया। अधिकारियों के मुताबिक, कई बच्चे बिना उचित टिकट या दस्तावेजों के यात्रा कर रहे थे और यह कार्रवाई बाल कल्याण समिति से मिली जानकारी के बाद की गई।

मामले में कानूनी प्रतिनिधियों ने FIR को चुनौती दी है। वहीं, इमारत-ए-शरिया के काज़ी अतीकुल्लाह ने कहा कि धार्मिक शिक्षा के लिए बच्चों का इस तरह यात्रा करना एक पुरानी और कानूनी रूप से मान्य परंपरा है।

यह मामला अब प्रशासनिक कार्रवाई और अभिभावकों के आरोपों के बीच टकराव का रूप ले चुका है, जिसमें निष्पक्ष जांच की मांग तेज होती जा रही है।

Related posts

Leave a Comment